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अनुकूल वातावरण

कंटीले नुकीले
कांटेदार केक्टस ही केक्टस
है चहुँओर। 
खरपतवार ने कर लिया है
कब्जा पूरे बगीचे पर। 
लहूलुहान तितलियां
लाचार,बेबस 
ढूंढ रही है
सुरक्षित आश्रय। 
आओ !
हम सब मिलकर
उखाड़ फेके इस
अनचाही खरपतवार को,
और बनाये एक ऐसा
गुलशन जहाँ सभी के लिए हो
समुचित स्थान,
जहाँ फूल मुस्कुरा सके
परिंदे चहचहा सके। 
और तितलियां 
बचा सके खुद को
नुकीले कांटो से। 

डॉ दिलीप बच्चानी। 

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