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Showing posts from May, 2026
मुसीबत में तुम्हें कोई याद करे,तुम कामयाब हो।  कोई तुम पर जब विश्वास कर,तुम कामयाब हो।  अपने लिए तो रोज ही मांगते है लोग मगर, तुम्हारे लिए कोई फरियाद करे,तुम कामयाब हो। 

शेर

कौन कैसा है किधर से मालूम होता है कैसा है बशर नजर से मालूम होता है
अब गरीबी का आलम ये हुआ प्लास्टर उखड़ने लगे हैं दीवारों से। 

गजल

ये बता, ख़ुद से ये मसख़री क्यों है, तेरे अंदर ये कमतरी क्यों है। था कभी एक आँगन अपना भी, अब ये दीवार तेरी-मेरी क्यों है। एक ही छत थी, एक ही चूल्हा, घर में फिर आज बेदिली क्यों है। कल तलक साथ थे सभी अपने, आज रिश्तों में अनबनी क्यो है। वक़्त बदला तो लोग भी बदले, हर तरफ़ इतनी बेरुख़ी क्यों है। दिल के दरवाज़े बंद हैं कब से, फिर भी आँखों में नमी क्यों है।