लीजिये साहब!आ गया आपका ठिकाना। और सबसे मजेदार बात ये है कि सड़क के इस पार आपका प्रदेश है और उस पार दूसरा। टैक्सी से नीचे उतरते ही पैर मिट्टी में धंस गया, ये है इस प्रदेश का हाल। पर उसे सड़क के उस तरफ फैले कचरे के ढेरों से कोई आपत्ति नहीं थी।
मिलते.....बिछड़ते है हँसते....... रोते है। मन क्यो मचल रहा है, इक खेल.....चल रहा है। आते है..... जाते है खोते है.....पाते है। तुझे क्यो .....खल रहा है इक खेल.....चल रहा है। जीतते है.....हारते है गिरते है......उठते है। पल पल....पाला बदल रहा है इक खेल.....चल रहा है। चलता है..... रुकता है थमता है......ठहरता है समय है.....बदल रहा है इक खेल......चल रहा है। खेल चलेगा.....तब तक जब तक......ये धड़क रहा है। तू क्यो......मचल रहा है इक खेल....चल रहा है।