मन की बाते कह देते हो तुम भी मेरे जैसे हो बाहर भीतर कोई न अंतर तुम दर्पण के जैसे हो जैसे बहता निश्छल दरिया तुम दरिया से बहते हो जैसे बढ़ता कोई पौधा तुम तरुवर के जैसे हो सागर के भ...
चलो दिल को यूँही बहलाया जाये पुरानी यादो को पास बुलाया जाये गुजरा वक्त तो आ ही नही सकता कुछ लम्हो को पास बिठाया जाये सफर की धूल से सराबोर होकर खुद को फिर सजाया सँवारा जाये म...
बाद में शिवालों को सजाया जाये पहले हर पेट तक निवाला जाये कही धूप है कही तरुवर की छाँव कोई बीच का रास्ता निकाला जाये तंग गलियो में सहमी मुस्कराहटें किसी तरह वहाँ उजाला जाय...