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क्या फायदा अच्छी यादाश्त का जो गमो को भूलने ही नही देती। 
रात का इंसान अलग,दिन का कुछ अलग रंग रोगन पुताई भी कोई चीज होती है। 

गजल

इसकी कट रही,उसकी गुजर रही है जिंदगी जीने वालों की कमी बहोत है।  दौड़ दौड़ कर कितना दौड़ोगे आखिर पाँव तुम्हारे दो और यहाँ जमी बहोत है।  कुछ उदास है तो कुछ है खोई खोई सी कुछ पथराई सी तो कुछ में नमी बहोत है।  ऐ मुश्किलों गुरुर न करो इतना खुदपर टकराने के लिए अकेले  हमी बहोत है।  ढूंढ रहा हूँ जाने कब से बस्ती में इंसान यू तो यहाँ देखने को आदमी बहोत है। 
जरा सा कद क्या बड़ा इतराने लगे अब उन्हें हम बौने नजर आने लगे।  जो कतराते थे नजर मिलाने से भी वह लोग भी अब इधर आने लगे। 
दिल की बात कहने को जुबा की जरूरत क्या मोहब्बत जिनमे हो वो आँखे बात करती है। 

बेलबाग

सुपारी सिकी हुई डालू,कच्ची या चिप्स।  कच्ची डाल दो चाचा।  एक बात पूछे चाचा,ये कोठे जो कभी रक्स और मौसिकी से गुलजार हुआ करके थे,वीरान क्यो है।  अब क्या बताए मियां,सब की सब वेश्याएँ कोठे बेच बेच कर पॉश कालोनियों में चली गई।  अब वो शरीफो की तरह दिखती है ऒर सफेदपोशो के साथ धंधा करती है।  और बिना वजह अपना ये बेलबाग बदनाम का बदनाम। 

जिंदगी ओर तंबाकू

अबे सुन बे  ये जो जिंदगी है इसका और तंबाकू का गहरा रिश्ता है।  वो कैसे बे।  बढ़िया जिंदगी रजनीगन्धा तुलसी पान पराग बाबा उससे कम विमल कमलप्सनक्स राजनिवास।  बिल्कुल घटिया तानसेन कुबरा नटखट।  बज कहानी खत्म।  अरे नही बे।  अगर ये सब नही है तो कई लोग मर रहे है मिराज चूस के ओर बीड़ी फूक के।