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अगर और तारीख।

अगर इस तारीख तक ये नही हुआ तो? अगर इस तारीख तक टार्गेट पूरा नहीं हुआ तो? अगर इस तारीख तक ई एम आई नहीं भरी तो? अगर इस तारीख तक स्कूल फीस नहीं भरी तो? अगर इस तारीख तक  व्यापारी को पेमेंट नही भेजी तो? अगर इस तारीख ..... और आखिर हम पहुच जाते है उस तारीख तक, जिसके बाद कोई तारीख नही आती। 

सड़क पर सफर।

कोई चलता है मंथर गति से, तो कोई रौंद डालना चाहता है इसे रफ्तार से।  यहाँ सभी की अलग गति तो है, चलने का अंदाज भी अलग है।  हर मस्तिष्क यहाँ सजग भी है और बेफिक्र भी।  चलते चलते आ जाता है कोई गड्डा,तो निकल जाती है गाली भी।  ट्रैफिक सिग्नल को जल्द पार करने की व्यग्रता,और मंजिल पर पहुँचने का उतावलापन।  कभी भीड़ से भरी होती है, तो कभी सुनसान भी।  देखा जाए तो  बिल्कुल मिलताजुलता है सड़क का सफर जिंदगी के सफर से। 

गजल

छत,दीवार,दरवाजे बगावत करते है क्या क्या सभाले नीव का पत्थर आखिर। वो तीर,तलवार,खंजर सब मेरे लिए है भला कब तक बचाये कोई सर आखिर।  इस मरुथल में दूर तक साया ही नही वोही जाने कैसे तय होगा सफर आखिर।  इस शहर में अपने गांव वाली बात नही इतने जतन से भी मेरा न हुआ शह्र आखिर। जो आये और भिगो दें मेरे अंतस को न जाने कब आयेगीं वो लहर आखिर। टूटता ही जा रहा हूँ अनगिनत टुकड़ो में पता ही नहीं होगी कब उसकी महर आखिर।  वो कहते है जिंदगी अमृत के समान है इससे तो बहुत बेहतर होगा जहर आखिर। 
मन के दर्पण में यदि आप सुंदर हो तो आप से सुंदर कोई नही। 

युद्ध का बदलता स्वरूप।

लेबनान में हिजबुल्लाह आतंकियों पर हुए पेजर अटैक ने मध्यपूर्व एशिया में चल रहे युद्ध का परिदृश्य ही बदल कर रख दिया है। हिजबुल्लाह के चीफ ने अपने आतंकियों को मोबाईल न उपयोग करने की सलाह दी थी, क्योकि उसे लगता था कि मोबाईल को ट्रेस किया जा सकता है।  इसलिए वो लोग पेज़र का इस्तेमाल करते थे, अब वो ही पेज़र बम की तरफ फट कर उनका ही विनाशक बन गया।  दुनिया मे जितने भी युद्ध हुए है पलड़ा उसी का भारी पड़ता है जो परंपरागत युद्ध शैली से हटकर युद्ध करता है।  उदाहरण के रूप में महाभारत के युद्ध को ही देख ले,महाभारत युद्ध में 14वे दिन कौरव घटोत्कच की युद्ध शैली देखकर हतप्रद रह गए। अपनी सेना के पैर उखड़ते देख दुर्योधन ने कर्ण से देवेंद्र द्वारा दी हुई अचूक शक्ति घटोत्कच पर चलवा दी और कुरुक्षेत्र का युद्ध अपने अंत की ओर बढ़ चला। इसी प्रकार लंबे अरसे तक चले द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले ने दूसरे सभी देशों को घुटनों पर ला दिया और एक नई वैश्विक व्यवस्था का निर्माण हुआ।  अभी वर्तमान में चल रहे रूस यूक्रेन युद्ध को ही देख लीजिए,रूस के शक्तिशाली टैंक ...

सरस्वती वंदना।

"बैंक की किश्ते न चुका पाने के कारण बड़ा घर बेचकर फ्लैट खरीदकर उसमे शिफ्ट होने की तैयारी चल रही थी"। "चलो अब हर महीने की बैंक की किश्तों से तो छुटकारा मिलेगा,अपनी इच्छाओं को कुचलकर बैंक की ई एम आई नही भरनी पड़ेगी"।  रितेश! पर एक समस्या है ये इतना सारा सामान इस घर मे तो जगह की कोई कमी नही थी पर दो कमरों के फ्लैट में इतना सामान कैसे रखेंगे..... अपूर्वा! जो सामान जरूरी है सिर्फ वो ही ले जाएंगे बाकी का फालतू सामान बेच दो या किसी जरूरतमंद को दे दो..... "और इस बड़े से कार्टुन में जो किताबे भरी पड़ी है उनका क्या करना है"।  मेरे लिए इन किताबो से ज्यादा कीमती कोई चीज नही है,इन्हें मत बेचना..... और एक बात हमेशा याद रखना।  *जिस घर मे सरस्वती होगी वहाँ लक्ष्मी जरूर वापस आ जायेगी*।