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इक खेल चल रहा है(कविता)

मिलते.....बिछड़ते है
हँसते....... रोते है। 

मन क्यो मचल रहा है,
इक खेल.....चल रहा है। 

आते है..... जाते है
खोते है.....पाते है।

तुझे क्यो .....खल रहा है
इक खेल.....चल रहा है। 

जीतते है.....हारते है
गिरते है......उठते है। 

पल पल....पाला बदल रहा है
इक खेल.....चल रहा है। 

चलता है..... रुकता है
थमता है......ठहरता है

समय है.....बदल रहा है
इक खेल......चल रहा है। 

खेल चलेगा.....तब तक
जब तक......ये धड़क रहा है। 

तू क्यो......मचल रहा है
इक खेल....चल रहा है। 

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