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राम ब्रह्म परमार्थ रूपा
अविगत, आगत,अनादि अनूपा। 

नाथ सकल संपदा तुम्हारी
मैं सेवक समेत सूट नारी। 

संवाद का गर्थ

रामायण और नारी वर्णन

नारद ओर रत्नाकर संवाद। 

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शेर

कौन कैसा है किधर से मालूम होता है कैसा है बशर नजर से मालूम होता है
मुसीबत में तुम्हें कोई याद करे,तुम कामयाब हो।  कोई तुम पर जब विश्वास कर,तुम कामयाब हो।  अपने लिए तो रोज ही मांगते है लोग मगर, तुम्हारे लिए कोई फरियाद करे,तुम कामयाब हो। 
अब गरीबी का आलम ये हुआ प्लास्टर उखड़ने लगे हैं दीवारों से।