भ्र्ष्टाचार भविष्य है और वर्तमान घोटाले है संसद के ये सभी जानवर तीखे दांतो वाले है। आजकल तो जब भी देखो घोटाले डर घोटाले है पहले साले आग लगते बाद में उसमे घी डाल है अपनी भार...
h1 जितना मालिक ने दिया उतने में संतोष, दूजा आगे बढ़ रहा इसमें किसका दोष। 2 कभी नही थम सकता है उसकी आंख का नीर जिसने समझी दूजे की पीर को अपनी पीर। 3 सूरज दिन भर का थका चला सांझ के गां...
वार्तालाप का माध्यम नही है हिंदुस्तान की जान है हिंदी। चहुँओर फैली सुगंध इसकी माँ भारती का मान है हिंदी। परदेस में भी पांव पसार रही मेरा तो अभिमान है हिंदी। देश को एक सूत्...
शिक्षित गंवार (लघुकथा) बस स्टैंड की बैंच पर बैठते हुए अंकित बोला। अरे यार सुनील पता नही कब बस आएगी,कितनी गंदगी है यहाँ और ये मक्खियां बाप रे बाप ! पास में जमीन पर बैठे ग्रामीणो...
स्वाति रात में पानी पीने के लिए उठी तो राजीव को पसीने से लथपथ लैपटॉप पर काम करते हुए पाया। अरे ! राजीव इतनी रात अब क्या काम कर रहे हो। और ये ए सी रूम में भी तुम्हे इतना पसीना क्य...