कॉफी हाउस में सुधीर और मैं आमने सामने बैठे थे। कॉफी की चुस्की लेते हुए सुधीर बोला, क्या बात है ? तनय आज कुछ उदास लग रहा है। हाँ ! आज रश्मि की बरसी है। दस साल हो गए भाभी जी को गुजरे औ...
नरसंहार ( लघुकथा) पापा पापा मेरी गुड़िया जल रही है.... रहने दे बेटी नयी ले आएंगे पुरे मोहल्ले में आग लगने के बाद अरविन्द क़ौल उसका परिवार और पूरा कुनबा बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भा...