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मजाकिया दोहे

1 यूं ही कुछ मस्ती।  बोतल पीकर चल दिया, ऐसे मेरा यार मुझसे ज्यादा उसको था, बोतल ही से प्यार।  ©डॉ दिलीप बच्चानी।

दो शेर

आसानियां बेस्वाद हुआ करती है मुश्किलो में जायका हुआ करता है। परिंदा जब भी कैद में फस जाता है तब ही निकलने की दुआ करता है।

दो शेर

मासूमियत होती है मक्कारी नही होती पुराने चेहरो पर अदाकारी नही होती। सबको एक सा समझने वाले मासूमो में किसी कि भी खातिर तरफ़दारी नही होती।

दो शेर

आसानियां बेस्वाद हुआ करती है मुश्किलो में ज़ायका हुआ करता है। परिंदा जब भी कैद मे आ जाता है तब वो निकलने की दुआ करता है।          ©डॉ दिलीप बच्चानी।

वनवे नही है।

कॉफी हाउस में सुधीर और मैं आमने सामने बैठे थे। कॉफी की चुस्की लेते हुए सुधीर बोला, क्या बात है ? तनय आज कुछ उदास लग रहा है। हाँ ! आज रश्मि की बरसी है। दस साल हो गए भाभी जी को गुजरे औ...

कविता।

कुछ यूँही.... कंटीले पौधे खारा पानी बेस्वाद जिंदगी बेकार जवानी चलती साँसे घड़ी की सुइयां रुकता दरिया गंदला पानी उनकी यादे झूठे सपने उनिंदि आँखे सिर्फ पशेमानी उखड़ी साँसे झ...

नरसंहार लघुकथा

नरसंहार ( लघुकथा) पापा पापा मेरी गुड़िया जल रही है.... रहने दे बेटी नयी ले आएंगे पुरे मोहल्ले में आग लगने के बाद अरविन्द क़ौल उसका परिवार और पूरा कुनबा बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भा...