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वनवे नही है।

कॉफी हाउस में सुधीर और मैं आमने सामने बैठे थे।
कॉफी की चुस्की लेते हुए सुधीर बोला, क्या बात है ? तनय आज कुछ उदास लग रहा है।
हाँ ! आज रश्मि की बरसी है।
दस साल हो गए भाभी जी को गुजरे और इन दस सालों में तूने क्या किया सब कुछ छोड़कर यहाँ तक की अपना देश छोड़कर यू ए ई में नौकरी कर ली।
क्या बताऊँ सुधीर यहाँ मन जो नही लग रहा था।
और वहाँ मन लग गया क्योंकि वहाँ तेरी वो श्रीलंका वाली सहेली जो है असाँका,सुधीर मुझे छेड़ते हुए बोला।
अरे! नही ऐसी बात नही है उसने मुझे प्रपोज जरूर किया था पर मैने मना कर दिया।
अब क्या सोचा है वापस जाएगा या यही रहेगा।
पिछले हफ्ते खाने की टेबल पर बात की थी कि अब मैं वापस नही जाऊंगा यही परिवार के साथ रहूंगा तब तो सब खुश थे।
पर कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि मेरे बच्चे, मेरे भाई के बच्चे, भाई भाभी सभी का व्यवहार कुछ बदला बदला सा है।
सच बताऊ बुरा मत मानना अब उन्हें तेरी नही तेरे भेजे हुए पैसो की जरूरत है।
कुछ समय बाद तेरे बच्चों की शादियां हो जाएगी तेरे भाई के बच्चों की शादियां हो जाएंगी तब क्या करेगा,जिंदगी कोई वनवे नही है जो वापस लौटा नही जा सकता।

तनय जेब से मोबाईल निकाल उस मे व्यस्त हो गया।
क्या कर रहा है?
टिकट बुक करा रहा हूँ फ्लाइट की।
वापस अल हयात फार्मेसी में जॉब करने के लिये?
नही!असाँका से मिलने के लिए।

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