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नज्म

नज़्म:

किसी के पास बैठो
तो अदब से बैठो,
ये पास होना
सिर्फ़ जगह भरना नहीं होता,
ये किसी के दिल में
अपनी जगह बनाना होता है।

नज़दीकियाँ
अक्सर इंसान को हल्का कर देती हैं,
लहज़ा बदल जाता है,
अंदाज़ ढल जाता है—
पर तुम
अपनी तहज़ीब को थामे रखना।

जब दूर हो जाओ
और फासले
बातों से ज़्यादा लंबे हो जाएँ,
तब भी
अपने शब्दों को गिरने मत देना,
अपनी यादों को रूखा मत होने देना।

क्योंकि
अदब—
सिर्फ़ पास होने की ज़रूरत नहीं,
ये दूरियों में भी
जिंदा रहना चाहता है।

इसलिए—
जब पास बैठो
तो अदब से बैठो,
और जब दूर हो जाओ
तब भी
बेअदब मत होना।

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