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सरस्वती वंदना।

"बैंक की किश्ते न चुका पाने के कारण बड़ा घर बेचकर फ्लैट खरीदकर उसमे शिफ्ट होने की तैयारी चल रही थी"। "चलो अब हर महीने की बैंक की किश्तों से तो छुटकारा मिलेगा,अपनी इच्छाओं को कुचलकर बैंक की ई एम आई नही भरनी पड़ेगी"।  रितेश! पर एक समस्या है ये इतना सारा सामान इस घर मे तो जगह की कोई कमी नही थी पर दो कमरों के फ्लैट में इतना सामान कैसे रखेंगे..... अपूर्वा! जो सामान जरूरी है सिर्फ वो ही ले जाएंगे बाकी का फालतू सामान बेच दो या किसी जरूरतमंद को दे दो..... "और इस बड़े से कार्टुन में जो किताबे भरी पड़ी है उनका क्या करना है"।  मेरे लिए इन किताबो से ज्यादा कीमती कोई चीज नही है,इन्हें मत बेचना..... और एक बात हमेशा याद रखना।  *जिस घर मे सरस्वती होगी वहाँ लक्ष्मी जरूर वापस आ जायेगी*। 

लघुकथा

बैंक की किश्ते न चुका पाने के कारण, इतना बड़ा मकान बेचकर छोटा घर तो ले लिया। पर अब इतना सामान इस घर मे आएगा कैसे।  जो जरूरत का सामान हो वो रखो फालतू का सब कबाड़ में बेच दो।  और इस कार्टून का क्या करना है।  अरे! इसमें किताबे है और इससे कीमती चीज कोई नही होती। 

लघुकथा

सविता,विभा और विवेक एक कैफे की टेबल पर एक साथ बैठे कॉफी का लुत्फ ले रहे थे।  सविता विभा की ओर देखते हुए बोली तुम और विवेक इतने सालों से साथ काम कर रहे हो, साथ ही उठते बैठते,घूमते फिरते हो! तुम दोनों शादी क्यो नही कर लेते? मैं तो कब से कह रहा हूँ शादी के लिए पर विभा मानने को तैयार ही नही है।  नही विवेक मै शादी नही कर सकती। सविता बोली, क्यो? विभा चुपचाप कॉफी का मग लेकर सिप लेने लगी।  अरे!यार आखिर प्रॉब्लम क्या बताओगी तो पता चलेगा।  विभा ने गंभीर मुद्रा में कहा।  हार्मोनल डिस्टर्बेंस के कारण मै माँ नही बन सकती। विवेक ने विभा के हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, शादी सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए नही की जाती।  शादी का मतलब है दो लोग अपनी सहमति से सामंजस्य के साथ एक साथ जीवन बिताना चाहते हैं।  औऱ ये किस बेवकूफ ने तुम्हे कह दिया कि।  "औरत सिर्फ एक बच्चा पैदा करने वाली मशीन है" विभा ने संजीदगी से अपना दूसरा हाथ विवेक के हाथ पर रख दिया। 
पैर सदा  हाथों से दबाए गये और कमर पैरों से दबाई गई। गर ई इंसान रीद की हड्डी की कद्र करता तो आज इतना झुका हुआ नही होता।

विचार से विकास है और विचार से ही विनाश।

मनुष्य जीवनपर्यंत विचारों से घिरा रहता है, जब आप सोचते है कि आप कुछ नही सोच रहे तब भी आप कुछ न कुछ सोच रहे होते है।  यहाँ तक की नींद में आये स्वप्न भी आपके ही विचारो का प्रतिरूप होते है।  विचार ही मनुष्य को सफल या असफल बनाता,विचार ही हमे अच्छा या बुरा बनाता है।  एक सदविचार से ही किसी महान ग्रँथ की नींव पड़ती है और किसी कुबुद्धि के मस्तिष्क में जन्मे एक कुविचार से ही समाज मे अराजकता फैलती है।  क्रोंच पक्षी के क्रंदन को सुनकर महर्षि वाल्मीकि के मन मे जन्मे विचार ने ही रामायण जैसा महान ग्रँथ लिख दिया। और यहूदियों के प्रति नफरत के कुविचार ने हिटलर से महा नरसंहार करवा दिया।  भीष्म पितामह के प्रति जन्मे प्रतिहिंसा के विचार से ही शकुनी ने महाभारत करवा दी,और अर्जुन को पुरुषार्थ का मार्ग दिखाने के सदविचार ने पूर्णावतार योगेश्वर श्री कृष्ण से भगवत गीता जैसा विलक्षण ज्ञान कहलवा दिया।  दुख का कारण खोजने के विचार ने सिद्धार्थ को महल त्याग कर बुद्ध होने के मार्ग पर चलना सीखा दिया,तो अंग्रेजो द्वारा काले लोगो के प्रति नफरत का प्रतिरोध करने के विचार ने दुनिया को महात्मा गां...
पिता छत है और माँ है आँगन बिन दोनों के जीवन में सूनापन।
जरूरी नहीं कि हर वक्त पास तू आये तू न हो तो भी तेरे बदन की खुशबू आये।