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लघुकथा

कड़वा फल ( लघुकथा )

ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी रजनी अपने मेकअप को फिनिशिंग टच दे रही थी |
शोभा ने बेटी को बड़े दुलार से समझाते हुए कहा देख लड़के से अच्छे से मिलना |
ओके माँ आई विल मैनेज औऱ हाँ रेस्तरां में मिलकर मैं सीधे ऑफिस निकल जाऊंगी |
ओके बाय
सामान्य परिचय औऱ बातचीत के दौरान ही अविनाश औऱ रजनी आधी कॉफी पी चुके थे |
देखो रजनी स्ट्रेट फॉरवर्ड बात कहूंगा बुरा मत मानना|
हाँ बोलो ?
मेरे कम्पेरिजन में तुम बहुत ओवर वेट हो
इसलिए सॉरी |
आफिस न जाकर रजनी सीधा घर आ गईं पता नही क्यो सर भारी हो रहा था |
क्या हुआ रजनी जल्दी घर आ गयी |

साला मुझे मोटी बोलकर रिजेक्ट करके चलता बना |
तूने भी तो आजतक कइयों को बिना वजह रिजेक्ट किया है सोच वो कितने दुखी हुए होंगे

                   © डॉ दिलीप बच्चानी
                   पाली मारवाड़ राजस्थान
                   9829187615

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