काले मुस्टंडे सेठ की हंटर सी कड़कती आवाज छोटू ऊपर 20 नम्बर में दो चाय दे के आ औऱ जल्दी आना वरना ये कप प्लेट क्या तेरा बाप धोएगा
नन्हे हाथो में चाय की केतली औऱ गिलास थामे नीम अंधेरी सीढ़ियां चढ़ता हुआ दरवाजे तक पहुँचा अंदर से अजीब सी आवाजें आ रही थी
औऱ जैसे ही पर्दा हटाया चाय की केतली गिर गयी गिलासों के टूटने की आवाज
समर बिस्तर से अचानक उठ बैठा पसीने पसीने दिल धड़क नही रहा हो मानो पसलियों पर चोट कर रहा हो
पास लेटी सरला भी उठ बैठी
आज फिर वो ही सपना
आप भूल क्यो नही जाते अपने कड़वे अतीत को
सरला पत्थर पर लिखा हुआ मिट जाता है
पर मन पर लिखा कभी नही मिटता
डॉ दिलीप बच्चानी
पाली मारवाड़ राजस्थान
9829187615
सोशल मीडिया और राष्ट्रीय संप्रभुता नेपाल में सोशल मीडिया बैन को लेकर जारी विरोध केवल एक देश का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने सूचना के आदान-प्रदान को सरल बनाया है, लेकिन आज यही माध्यम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को अस्थिर करने का औजार भी बनता जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली बड़ी कंपनियाँ अपने मुनाफ़े के लिए तो हर देश में सक्रिय रहना चाहती हैं, किंतु उस देश के कानून और नियमों का पालन करने से कतराती हैं। यह प्रवृत्ति राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए सीधा खतरा है। हाल के वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल में देखा गया है कि किस प्रकार युवाओं के असंतोष को सोशल मीडिया पर उकसाकर बड़े आंदोलनों का रूप दिया गया। सत्ता परिवर्तन तक की कोशिशें इन माध्यमों से संभव हो रही हैं। इसमें केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हाथ रहता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ किसी भी देश की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित क...
Comments
Post a Comment