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नरक से बाहर लघुकथा

नरक से बाहर  ( लघुकथा )

बेटे की रोज रोज की पैसे की डिमांड पूरी कर कर के वीरेंद्रनाथ परेशान हो चुका था,और फिर आज उसका रिजल्ट देखकर तो दिमाग ही खराब हो गया।
देहली से सीधा पूना पहुँचा तो ये क्या सुनील का फ्लैट लॉक।
दूसरी चाबी से दरवाजा खोल अंदर इंतजार करने लगा।
पूरी रात गुजरने के बाद सुबह सुनील आया नशे में धुत्त।
उसने बड़ी मुश्किल से उसे बेड पर सुलाया।
अरे! ये हाथो पर इतने इंजेक्शन के निशान।
सुनील छह घण्टे बाद जागा तो मोबाइल में पड़ोस वाले अंकल का मेसज
तेरे पापा को अटैक आया है 27 नम्बर सेक्टर निगड़ी स्टर्लिंग हॉस्पिटल जल्दी पहुच।
चार घण्टे बाद पापा के बेड के पास आई सी यू में ,पापा की आंखे आँसुओ से भरी थी।
सॉरी पापा गलती हो गई आप जल्दी ठीक हो जाइए फिर मैं एडमिट होऊँगा

डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर में।

                     ©डॉ दिलीप बच्चानी
                      पाली मारवाड़ राजस्थान
                      9829187615

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