कॉलेज के बगल वाली सड़क के उस पार फास्टफूड के ठेलो को लंबी कतार थी।
चल सचिन चाउमीन खाते है रहने दे विनय रोज वो ही चाउमीन,पास्ता,बर्गर,पिज़्ज़ा बोर हो गए यार।
कुछ नया देखते है वो देख एक नया गोलगप्पे वाला आया है।
ठीक है चल।
गोलगप्पे खाते हुए सचिन ने ठेले वाले से पूछा कितने दिन से यहाँ ठेला लगा रहे हो चाचा।
स्वाद तो बहुत बढ़िया है गोलगप्पे का।
पांच दिन हुए बेटा गाँव से आये हुए। गोलगप्पे क्या हमारी चाट पकोड़ी भी बहुत स्वादिष्ट है देसी घी में तलते है।
पर क्या बताये यहाँ कोई ग्राहकी नही है सब लोग चाउमीन, मंचूरियन, पास्ता, पिज़्ज़ा,मोमोज़ खाते है हमारे पास तो कोई इक्का दुक्का ही आते है।
अभी रुको चाचा तुम्हारी समस्या का समाधान करते है।
दोनों दौड़ कर पास वाले मॉल में घुस गये कुछ देर बाद हाथ मे हैंडबैग लेकर आते ही ठेले वाले को थमा दिया।
ये सब क्या है बेटा।
देखो चाचा ये है टोपी इस को सर पर लगाकर रखा करो।
औऱ ये है एप्रेन इसे कपड़ो के ऊपर पहन लिया करो।
औऱ सबसे जरूरी ये ग्लब्स जब भी गोलगप्पे खिलाओ ये पहन कर खिलाओ।
फिर देखो तुम्हारी ग्राहकी कैसे चमकती है।
अच्छा कल मिलेंगे।
अरे ! बेटा इस सब का पैसा तो लेते जाओ।
गोलगप्पे,चाट पकोड़ी खाकर बराबर कर देंगे।
ओके बाय।
जुग जुग जियो बेटा सदा खुश रहो।
(अपने आँसू पोछते हुए)
सोशल मीडिया और राष्ट्रीय संप्रभुता नेपाल में सोशल मीडिया बैन को लेकर जारी विरोध केवल एक देश का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने सूचना के आदान-प्रदान को सरल बनाया है, लेकिन आज यही माध्यम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को अस्थिर करने का औजार भी बनता जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली बड़ी कंपनियाँ अपने मुनाफ़े के लिए तो हर देश में सक्रिय रहना चाहती हैं, किंतु उस देश के कानून और नियमों का पालन करने से कतराती हैं। यह प्रवृत्ति राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए सीधा खतरा है। हाल के वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल में देखा गया है कि किस प्रकार युवाओं के असंतोष को सोशल मीडिया पर उकसाकर बड़े आंदोलनों का रूप दिया गया। सत्ता परिवर्तन तक की कोशिशें इन माध्यमों से संभव हो रही हैं। इसमें केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हाथ रहता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ किसी भी देश की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित क...
Comments
Post a Comment