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भारतीय गणतंत्र।

विश्व की सबसे पुरानी मानव सभ्यताओं में से एक हमारा भारत देश एक लोकतांत्रिक गणतंत्र है। 
पूरी दुनिया में 206 सम्प्रभु देशो में से 159 देश ऐसे है जो अपने नाम के साथ रिपब्लिक स्टेट लगाते हैं। संसार के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अमरीका,फ्रांस, चीन,ब्रिटेन सहित भारत भी उस सूची में शामिल है जो अपने आप को गणराज्य कहने का गौरव रखते है। 
गणतंत्र में गण शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है जनता और तंत्र का अर्थ है प्रणाली, अर्थात गणतंत्र पूरी तरह राष्ट्र की जनता द्वारा संचालित और समर्पित व्यवस्था है। 
गणतंत्र या गणराज्य शब्द हमारे भारत के लिए कोई नया नही है 450 ईसापूर्व के भारतीय नगर वैशाली,कपिलवस्तु, मिथिला को दुनिया का सबसे पुराना गणतंत्र माना जाता है। ऋग्वेद में गणराज्य शब्द का प्रयोग चालिस बार तथा अथर्ववेद में नौ बार किया गया है। जबकि पौराणिक ग्रन्थो में अनेकों बार इस शब्द का उल्लेख मिलता है। 
भारत के संविधान का निर्माण संविधान निर्माताओं ने अथक परिश्रम के साथ दो साल ग्यारह महीने और अठारह दिनों में किया। 
डॉ भीमराव आंबेडकर जो संविधान निर्माण की प्रारुप समिति के अध्यक्ष थे उन्होंने बहुत ही दूर दृष्टि के साथ इस विशाल देश को एक व्यवस्था में बांधने का अति महत्वपूर्ण कार्य किया। 
संविधान निर्मात्री सभा मे कुल 389 सदस्य शामिल थे जिसकी अध्यक्षता डॉ राजेंद्र प्रसाद के द्वारा की गई। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्रदान करता है जाती पाती धर्म भाषा क्षेत्र के आधार पर कही कोई भेदभाव नही किया गया है। संविधान में समयानुसार आवश्यकता आनुसार कई संशोधन भी किये गए परन्तु संविधान की मूल भावना आज भी वैसी ही है जैसी पहले थी। 
26 जनवरी 1950 को 21 तोपो की सलामी के साथ भारत के संविधान को अपनाया गया और डॉ राजेन्द्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति बने। 
71 वर्षो के इस कालखंड में भारत ने एक धरनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप उत्तरोत्तर विकास करते हुए विश्व पटल पर अपना एक विशेष मुकाम हासिल किया है। 

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