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कर्फ़्यू ?

डायनिग हॉल में बैठा शर्मा परिवार सुबह के नाश्ते के साथ टीवी पर समाचार देख रहा था। 
चैनल पर फटाफट समाचार दिखाने का समाचार शतक कार्यक्रम चल रहा था। 
पूरे देश मे लॉक डाउन और कर्फ्यू के बावजूद नही थम रहा कोरोना का कहर। 
लगातार बढ़ रहा है कोरोना मरीजो का आंकड़ा। 
कोरोना संकट के बीच नजर आया पुलिस का अलग ही रूप। 
सूरत में सड़कों पर उतरे मजदूरों को मान मनव्वल कर समझाती दिखी पुलिस। 
काफी समझाइश के बाद मजदूरों को वापस भेजा अपने घर। 
बुलन्दशहर में महिला एस पी ने हाथ जोड़कर नमाजियों को समझाया,मस्जिद में नमाज पढ़ने की कर रहे थे जिद। 
हाइवे पर पैदल जा रहे मजदूरों को पुलिस ने बाटे खाने के पैकेट,वही पर की उनके ठहरने की व्यवस्था।
अमुमन चौराहों पर चालान काटने वाली पुलिस लोगो को समझा रही है सोशल डिस्टेंसिंग,सेनेटाइजर से धुलवाए हाथ। 
औरंगाबाद की महिला पुलिस कर्मियों ने ड्यूटी के बाद बनाये मास्क,सफाईकर्मियों को मुफ्त में किये वितरण। 
दिल्ली पुलिस की अनूठी पहल महिला डॉक्टर के घर सायरन बजाती हुई पहुची पुलिस की गाड़ियां बर्थडे केक और गुलदस्ता देकर जन्मदिन की दी शुभकामनाएं। 
समाचार चैनल में कमर्शियल ब्रेक के कारण विनीत ने आवाज म्यूट कर दी। 

तभी विनीत के दादा जी बोल पड़े,काश! आज से पहले हुए कर्फ्यू में भी पुलिस इतनी ही विनम्र होती तो आज मुझे इन बैसाखियों की जरूरत नहीं होती। 

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