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गजल

इशारो से आँख से अदा से बात करती है
मोहब्बत कब भला ज़ुबाँ से बात करती है। 

पहली किरण गिरती है जब उसके पानी पर
देखना बहती नदी तब खुदा से बात करती है। 

गुल भृमर के मन को जाने भीच ले खुदको
कुदरत भी देखो किस हया से बात करती है। 

बेसबब भटकती नही वो सारे गुलशन में
हर कली हर फूल औ लता से बात करती है। 

सुबह कोई रंग भरता शाम कैसे स्याह होती
पंखुड़ी पर बैठ शबनम फ़िजा से बात करती है। 


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