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गजल

जो सूरज की तरह से यार जलना सीख जाएगा।
अंधेरे चीरना, उनसे निकलना सीख जाएगा।

न कोई हाथ पकड़ो ना सहारा दो उसे कोई,
खुद ब खुद वो मेरे साथी संभलना सीख जाएगा।

अभी मासूम है, मासूमियत जिंदा रहे उसमें,
किताबें पढ़ के वो फितरत बदलना सीख जाएगा।

सुनो ये दुनिया के दस्तूर, जैसे हथकड़ी कोई, 
जिस तरह तुमने सीखा, वो भी चलना सीख जाएगा।

यहां हर शख्स का अपना अलग किरदार होता है,
समय को देख वो सांचे में ढलना सीख जाएगा‌।

न दो तुम ज्ञान, ईश्वर ने सभी कुछ दे के भेजा है,
अगर बंदर है तो निश्चित उछलना सीख जाएगा।

अभी बच्चा है बचपना रहने तो दो तुम उसमे
खिलौने देखकर खुद ही मचलना सीख जाएगा।

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