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कल होगा? (कविता)

अमूमन हम सभी
अपने आज को
जबरदस्ती कल में
घसीटकर ले जाने
पर तुले है।
आज नही हुआ
तो क्या
कल कर लेंगे!
इसे आज पर खर्च
न करके,कल के लिए
सहेज लेते है। 
लगभग सभी का
दिवास्वप्न,
कल आज से
बेहतर होगा।
आज को किसी
न किसी तरह
गुजार रहे है
कल के लिए।

कितना भरोसा है
हमे की
कल होगा?

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