Skip to main content

आशीर्वाद। लघुकथा।

पूरे घर मे बहुत चहल पहल थी,पंडित जी पूजन सामग्री को व्यवस्थित करने और पूजा की तैयारी में लगे हुए थे। 
विभा और विवेक की प्रथम संतान के नामकरण संस्कार में शामिल सभी मेहमान भी लगभग आ ही चुके थे। 
अरे!  बाबा कहा है दिखाई नही दे रहे। 
वृद्धाश्रम गए होंगे उनके पुराने दोस्तों से मिलने,चिंता मत करो समय पर आ जाएंगे। 
वो देखो,बाबा आ गए। 
विधिवत पूजन प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद नवजात शिशु का नाम विभोर रखा गया। 
विभोर!अहा,कितना प्यारा नाम है। 
विभा ने चहकते हुए कहा। 
चलो,सबसे पहले इसे बाबा का आशीर्वाद दिलवा दे। 
विभा ने पल्लू सर पर रख विवेक सहित बाबा के चरण स्पर्श किये। 
विभोर को बाबा की गोदी में देते हुए कहा। 
बाबा इसे लंबी उम्र का आशीर्वाद दीजिये। 
बाबा ने बच्चे के माथे को चूमते हुए उसके सर पर हाथ फेरा। 
जब तक जिये स्वस्थ और प्रसन्न रहे। 
अरे! बाबा अपने लंबी उम्र का आशीर्वाद क्यो नही दिया?
क्योकि।
"लंबी उम्र हर किसी के लिए अच्छी नहीं होती बेटा। "

Comments

Popular posts from this blog

मृत्यु का मोल। (कविता)

"मृत्यु का मोल" ( व्यंग्य कविता) अंजान मरे — तो चुपचाप साइड से निकल लो, ना आँसू, ना सवाल — बस भीड़ में खुद को बचा लो। पड़ोसी मरे — तो पूछ लो संस्कार का समय, कंधा न सही, कम से कम दिखा दो थोड़ा नमन। जान-पहचान वाला गया — तो फेसबुक पर "ॐ शांति" लिख दो, दिल से नहीं, टाइपिंग स्पीड से दुख नाप लो। कोई अपना गया — तो आँसू भी प्रॉपर्टी के वजन से गिरते हैं, ग़म भी वसीयत के काग़ज़ों में सुकून ढूंढता फिरता है। और जब आप मरें — तो सोचो, कौन रोएगा सच में? कौन होगा जो तुम्हारे बिना रातों को जागेगा? मौत तो सबकी बराबर होती है — पर इस दुनिया में दुख भी रिश्तों के रैंक से बाँटा जाता है। डॉ दिलीप बच्चानी  पाली मारवाड़,राजस्थान।

आलेख

सोशल मीडिया और राष्ट्रीय संप्रभुता नेपाल में सोशल मीडिया बैन को लेकर जारी विरोध केवल एक देश का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने सूचना के आदान-प्रदान को सरल बनाया है, लेकिन आज यही माध्यम लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को अस्थिर करने का औजार भी बनता जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली बड़ी कंपनियाँ अपने मुनाफ़े के लिए तो हर देश में सक्रिय रहना चाहती हैं, किंतु उस देश के कानून और नियमों का पालन करने से कतराती हैं। यह प्रवृत्ति राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए सीधा खतरा है। हाल के वर्षों में श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल में देखा गया है कि किस प्रकार युवाओं के असंतोष को सोशल मीडिया पर उकसाकर बड़े आंदोलनों का रूप दिया गया। सत्ता परिवर्तन तक की कोशिशें इन माध्यमों से संभव हो रही हैं। इसमें केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हाथ रहता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ किसी भी देश की आंतरिक स्थिरता को प्रभावित क...

हे!मोबाईल। (कविता)

हे! मोबाईल तुम वाकई एक क्रांति हो।  पलक झपकते ही, पहुंचा देते हो  सूचनाएं सात समंदर पार।  कहा क्या अच्छा-बुरा हुआ सभी तो पता है तुम्हे।  हजारो संदेशो का आदान-प्रदान,वाकई बड़ा करामाती काम है।  पर हे! मोबाईल बुरा न मानो तो एक बात कहु।  तुम अखबार हो, तुममे वो चिठ्ठियों वाली मिठास नही है।