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गजल


यहाँ ताउम्र कौन यार साथ रहता है,
मौसम कहाँ सदा खुशगवार रहता है।


माना कि इश्क़ दर्द-ए-बेशुमार देता है,
लेकिन उसी से दिल को करार रहता है।


दुनिया के हादसों का ग़म न कर ऐ दिल,
मुझे तो अब भी उनका इनतजार रहता है। 


दुनिया में कौन किसका हुआ है दिल से,
इंसान भी कब तलक वफ़ादार रहता है।


"दिलिप" ये इश्क़ ही है जो ज़िन्दगी भर,
तनहा सफ़र में भी हमक़रार रहता है।


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