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जोगीरा

अफसर से ले पंगा केजरी हो गया है बेरंग किसके साथ होली खेले कोई नही अब संग              जोगी रा सा रा रा जेल में बैठा लालू अंदर होली खूब मनावे गाय भैस को देख आप ही मंद मंद मुस्काव...

लघुकथा

सौरभ बैंक की स्लिप भर ही रहा था की पीछे से किसी ने कहा बाबूजी एक पर्ची हमारी भी भर दो बिना पीछे मुड़े सौरभ ने कह दिया वहा टेबल पर जाकर बाबूजी से भरवा लो तभी पास में खड़े एक बुजुर्...

गजल

तेरे सारे सवालों का तेरे भीतर जवाब है फकत नीचे अंधेरा है ऊपर जलता चराग है क्यों बेज़ार होता है इस दुनिया की बातों से तेरे भीतर शिवाला है गर तेरा दामन बेदाग है यहाँ से कई लोग गु...

मुक्तक

आटे का डब्बा तेल की बोतल औऱ मसलेदानी ने आज पशेमाँ कर दिया मुझको घर की परेशानी ने