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लघुकथा

आलीशान मल्टीप्लेक्स की सिल्वर स्क्रीन पर चलती रोमांटिक फिल्म और सबसे ऊपर की पंक्ति में कोने की सीटो पर बैठे विनीत और रीटा। फ़िल्म का पूरा आनंद लेती हुई रीटा पॉपकॉर्न खा र...

दोहा

आर्यावृत इस देश में , तम्बू में भगवान । जरा आप बतलाइए , कैसे हो कल्याण ।।

घोटाले कविता

भ्र्ष्टाचार भविष्य है और वर्तमान घोटाले है संसद के ये सभी जानवर तीखे दांतो वाले है। आजकल तो जब भी देखो घोटाले डर घोटाले है पहले साले आग लगते बाद में उसमे घी डाल है अपनी भार...

दोहे

h1 जितना मालिक ने दिया उतने में संतोष, दूजा आगे बढ़ रहा इसमें किसका दोष। 2 कभी नही थम सकता है उसकी आंख का नीर जिसने समझी दूजे की पीर को अपनी पीर। 3 सूरज दिन भर का थका चला सांझ के गां...

हिंदी कविता

वार्तालाप का माध्यम नही है हिंदुस्तान की जान है हिंदी। चहुँओर फैली सुगंध इसकी माँ भारती का मान है हिंदी। परदेस में भी पांव पसार रही मेरा तो अभिमान है हिंदी। देश को एक सूत्...

गजल

कंटीले पौधे खारा पानी बेस्वाद जिंदगी बेकार जवानी चलती साँसे घड़ी की सुइयां रुकता दरिया गंदला पानी उनकी यादे झूठे सपने उनिंदि आँखे सिर्फ पशेमानी उखड़ी साँसे झुकते कंधे ...

शिक्षित गंवार लघुकथा

शिक्षित गंवार (लघुकथा) बस स्टैंड की बैंच पर बैठते हुए अंकित बोला। अरे यार सुनील पता नही कब बस आएगी,कितनी गंदगी है यहाँ और ये मक्खियां बाप रे बाप ! पास में जमीन पर बैठे ग्रामीणो...