कॉफी हाउस में सुधीर और मैं आमने सामने बैठे थे। कॉफी की चुस्की लेते हुए सुधीर बोला, क्या बात है ? तनय आज कुछ उदास लग रहा है। हाँ ! आज रश्मि की बरसी है। दस साल हो गए भाभी जी को गुजरे औ...
नरसंहार ( लघुकथा) पापा पापा मेरी गुड़िया जल रही है.... रहने दे बेटी नयी ले आएंगे पुरे मोहल्ले में आग लगने के बाद अरविन्द क़ौल उसका परिवार और पूरा कुनबा बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भा...
कोई न समझा कोई न जाना उलझा - उलझा ताना - बाना। कौन रहा है और कौन रहेगा चलता रहता आना - जाना। ये मेरा है और वो है उसका खेल - तमाशा खोना - पाना। तेरा - मेरा साथ तभी तक जब तक अपना आबो - दाना। ...
कुछ सबक... गाड़ी पर न मोबाइल का प्रयोग कीजिये जीवन अनमोल है सद्पयोग कीजिये। हैंडल छोड़कर स्टंट दिखाना महंगा पड़ेगा गर गिर गया तो फिर बैसाखियों पर चलेगा। सेल्फी खिचना आपको भटक...