Skip to main content

Posts

कल होगा? (कविता)

अमूमन हम सभी अपने आज को जबरदस्ती कल में घसीटकर ले जाने पर तुले है। आज नही हुआ तो क्या कल कर लेंगे! इसे आज पर खर्च न करके,कल के लिए सहेज लेते है।  लगभग सभी का दिवास्वप्न, कल आज से बेहतर होगा। आज को किसी न किसी तरह गुजार रहे है कल के लिए। कितना भरोसा है हमे की कल होगा?

केंद्रीय चुनाव परसेप्ट का चुनाव है।

ये साल देश के लिए नई सरकार चुनने का साल है।साल शुरू होते ही चुनावी गतिविधियों में भी तेजी देखी जा सकती है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव विभिन्न स्तरों पर लड़े जाते है जैसे कि लोकसभा, विधानसभा,नगर निगम,पंचायत आदि,सत्ता के विकेंद्रीकरण का ये एक बेहतरीन उदाहरण भी है।  अब चूंकि लोकसभा का चुनाव निकट है तो स्वाभाविक है कि चर्चा का केंद्र बिंदु केंद्रीय चुनाव ही रहने वाला है।  एक लोकसभा सदस्य का कार्यक्षेत्र बहुत बड़ा और बहुत फैला हुआ होता है,इसलिए चुनाव प्रचार के दौरान या उसके बाद के पांच वर्षों में भी सभी क्षेत्रों और मतदाताओं तक पहुँचना अत्यंत दुष्कर कार्य है।  तो फिर हार और जीत आखिर तय कैसे होती है ये सब तय होता है परसेप्शन के आधार पर।  परसेप्शन उम्मीदवार के पक्ष और विपक्ष में हो सकता है और परसेप्शन सरकार के पक्ष और विपक्ष में भी हो सकता है।  सरकार अपने कार्यकाल के दौरान जो फैसले लेती है उस आधार पर मतदाता अपने दिलोदिमाग में एक धारणा बना लेता है और फिर उसी आधार पर वोट पड़ते है और हार जीत का निर्णय हो जाता है। इसलिए हम देखते है कि हमारी अपनी लोकसभा या हमारे आसपास...

राम।

राम नाम मय हुआ आज सकल संसार भीगी भीगी पलके,हर्षित ह्रदय आपार।  दीपोत्सव है तैयारी सजे घर और द्वार दुख हरने को आ रहे सबके तारणहार।  मन की वीणा के सभी झनक रहे है तार भारतवर्ष में ले रहा रामराज्य आकार।  राम संदेशा दे रही यह सरयू की धार आज अवध में मगन है सारे नर औ नार। 
छोड़ो गमो का भार यहाँ, खुशी जीवन आधार यहाँ एक सफर ही तो खत्म हुआ है,चलना बहुत है यार यहाँ। 

जंजीरे

जंजीरे वो नही है जो बंधती है आपके हाथ पांव और सीमित कर देती है आपको एक कोने में।  कुछ अदृश्य जंजीरे हम सभी को बांधे हुए है जो दिखती नही है, पर उनकी पकड़  बहुत मजबूत है।  वे जंजीरे है विचारों की जंजीरे।  जो रोकती है आपको किसी दूसरे विचार को सुनने,सोचने और समझने से।  धर्म की जंजीरे जात पात की जंजीरे समाज की जंजीरे परिवेश की जंजीरे प्रांत की जंजीरे भाषा की जंजीरे शिक्षा की जंजीरे।  और सबसे बड़ी जंजीर है इन सांसो की जंजीर जिसने हमे बांध रखा है इस नश्वर शरीर से।  जिस दिन टूट जाएगी ये जंजीर हम आजाद होंगे अंनत व्योम की यात्रा के लिए।