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कवि सम्मेलन।

जोरो शोरो से प्रचार किया गया,अखबार, होर्डिंग, सोशल मीडिया पोस्ट के द्वारा विशाल कवि सम्मेलन का। 
तय समय से करीब दो घंटे बाद कार्यक्रम शुरू हुआ,
संचालक ने ओजपूर्ण वाणी में देशभक्ति से लेकर सहित्यप्रेम तक की बाते की। 
फिर आमंत्रित अतिथियों के वृहद परिचय दिए गए, और इस प्रकार दिए गए मानो सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्न यदि पर उपस्थित है। 
सरस्वती वंदना की औपचारिकता के बाद कवि सम्मेलन शुरू हुआ। 

संचालक महोदय ओजपूर्ण वाणी में बोले हम अति विनम्रतापूर्वक रूप से मंच पर बुलाना चाहते हैं श्रीमान ए को जिनका साफा पहनाकर स्वागत करेंगे श्रीमान क, मोमेंटो देंगे श्रीमान ख  और दुप्पटा पहनाएंगे श्रीमान ग। 

अब इसी क्रम में आप सब आते रहिए और सम्मानित होते रहिए। 

अब अंत मे हमारे लाडले कवि ज्ञ का स्वागत है। 
ज्ञ मंच की तरफ जा रहा था तभी अनुभवी आयोजनकर्ता ने कलाई थाम ली। संछेप में पढ़ना कार्यक्रम वैसे ही लेट हो गया है। 

कविता क्या है
कविता का बैठा हुआ है भट्टा,
मुख्य बात है
साफा, मोमेंटो और दुपट्टा। 


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नज़्म: किसी के पास बैठो तो अदब से बैठो, ये पास होना सिर्फ़ जगह भरना नहीं होता, ये किसी के दिल में अपनी जगह बनाना होता है। नज़दीकियाँ अक्सर इंसान को हल्का कर देती हैं, लहज़ा बदल जाता है, अंदाज़ ढल जाता है— पर तुम अपनी तहज़ीब को थामे रखना। जब दूर हो जाओ और फासले बातों से ज़्यादा लंबे हो जाएँ, तब भी अपने शब्दों को गिरने मत देना, अपनी यादों को रूखा मत होने देना। क्योंकि अदब— सिर्फ़ पास होने की ज़रूरत नहीं, ये दूरियों में भी जिंदा रहना चाहता है। इसलिए— जब पास बैठो तो अदब से बैठो, और जब दूर हो जाओ तब भी बेअदब मत होना।
उतारन ऐ चड़ावन जी कहानी आहे सीदी सादी जिंदगी बेस्वाद, बेमानी आहे।  कहिंखे घट कहिंखे वधिक मालिक़ डिनो आ मा शुकर भी करा हिय त बेईमानी आहे।