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हे!मोबाईल। (कविता)

हे! मोबाईल
तुम वाकई एक क्रांति हो। 
पलक झपकते ही,
पहुंचा देते हो 
सूचनाएं
सात समंदर पार। 
कहा क्या
अच्छा-बुरा हुआ
सभी तो पता है तुम्हे। 
हजारो संदेशो का
आदान-प्रदान,वाकई बड़ा
करामाती काम है। 
पर हे! मोबाईल
बुरा न मानो तो एक बात
कहु। 
तुम अखबार हो,
तुममे वो चिठ्ठियों वाली
मिठास नही है। 

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