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गजल

न सदा दिन रहा है,न सदा रात रहेगी मेघो को बरसने दो ये नदी फिर बहेगी।  गिर जाते वट वृक्ष समय विपरीत हो तो हरी रहेगी वो डाली जो तूफान सहेगी। मिटेगी कालिमा धवल आकाश होगा निशानी स्मृति पटल पर फिर भी रहेगी।  सहअस्तित्व,समन्वय और सजगता इस मूल मंत्र की कहानी पीढ़ियाँ कहेगी।  कई प्रलय काल भी देखे है इस धरा ने उस परम् की सत्ता न ढही है न ढहेगी।  मुश्किले आती रही है आती जाती रहेगी जिंदगी रुकती नही है न अब रुकेगी। 

लघुकथा

मोबाईल पर मेसेंजर का नोटिफिकेशन आया।  विनीत का मैसेज था  हाय ! क्या कर रही हो।  बस सेशनल एग्जाम की तैयारी।  आप सोये नही अभी तक, रक्षिता ने लिखा।  नही ! नींद ही नही आ रही।   ओके। गुड़ नाइट।  बाय। मै तो चली सोने।  रक्षिता और विनीत के बीच मेसेंजर पर ऐसी चैटिंग अमुमन होती ही रहती।  रक्षिता मॉर्डन जमाने की खुले विचारों वाली लड़की थी,विनीत उसकी सहेली का पति था जो कुछ ही दिन पहले फेसबुक मित्र बना था।  छोटी मोटी हँसी मजाक चुहलबाजी का रक्षिता ने कभी बुरा नही माना।  पर आज तो विनीत ने मेसेंजर पर जो वीडियो सेंड किया उसने रक्षिता को रात भर सोने नही दिया।  क्या थोड़ी सी हँसी मजाक और सोशल मीडिया पर दोस्ती का लोग इतना गलत मतलब निकाल लेते है।  आज तक हुई पूरी चैटिंग का पूरा रिकॉर्ड अपने पेन ड्राइव में सेव करके सुबह सवेरे ही रक्षिता  लोकल महिला पुलिस स्टेशन पहुच चुकी थी। 

भीड़ का मनोविज्ञान

भीड़ का मनोविज्ञान।  हमारे यहाँ धार्मिक, सामाजिक,राजनैतिक आयोजनों में एकत्रित भीड़ की संख्या को देखकर उसकी सफलता या असफलता का अनुमान लगाया जाता है।  फलां तिथि को इस मंदिर में लख्खी मेला भरता है पैर रखने तक कि जगह नही होती,दर्शनों के लिये कई कई घण्टो की कतारें लगती है।  जुम्मे की नमाज के दिन इस मस्जिद के सामने की सारी सड़क नमाजियों से भरी रहती है।  ट्रैफिक तक रोकना पड़ता है।  इस दरगाह पर मनाये जाने वाले उर्स की तो शान ही निराली है दूर दूर से लोग जियारत करने आते है।  अभी तो गुरु पर्व का सीजन चल रहा है हर कोई गुरु के दर पर मत्था टेकना चाहता है इसलिए सभी ट्रेन बुक चल रही है।  क्रिसमस के टाइम में कार्निवाल का आयोजन होता है बड़ी तो क्या किसी छोटी सी लॉज में भी कमरा नही मिलेगा।  न्यू ईयर पर सड़को पर निकलने वाली भीड़ हो या क्रिकेट के दीवानों का हुजूम।  क्या सभी त्यौहार, उत्सव,उल्लास के पल केवल भीड़ में ही मनाये जा सकते है।  क्या किसी विशेष तिथि को ही भगवान के दर्शन करना आवश्यक है या सिर्फ जुम्मे को ही नमाज कुबूल होती है अन्य दिन नही।  चर्च तो रोज ख...

गजल

इंसान इंसान से डर रहा है चहुओर सन्नाटा पसर रहा है।  मौत तो जाने कब आएगी हर पल डर डर के मर रहा है।  अंजान साये ने घेर लिया है उजाला अंधकार से डर रहा है।  विश्व शक्तियां परास्त हो चुकी भारतवर्ष भी समर कर रहा है।  हे जगतजननी तू ही रक्षा कर तेरा दास ये  अरज कर रहा है। 

श्री राम मंदिर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यारा होगा, सकल विश्व में सबसे सुंदर प्यारा होगा।  श्री राम लला अब तम्बू से बाहर आएंगे प्यासे नैना अब श्री राम के दर्शन पाएंगे।  श्री राम कृपा से जगत धन्य हो जाएगा, हर जन जन अब राम राम धुन गायेगा।  श्री राम कृपा से अवधपुरी सज जाएगी श्री राम छवि अब हर मन मे बस जाएगी।  श्री भगवा धर्म ध्वजा मंदिर पर लहरायेगी स्तय सनातन का संदेश जगत में गायेगी।  जय सियाराम।                        डॉ दिलीप बच्चानी                     पाली राजस्थान।

भारतीय गणतंत्र।

विश्व की सबसे पुरानी मानव सभ्यताओं में से एक हमारा भारत देश एक लोकतांत्रिक गणतंत्र है।  पूरी दुनिया में 206 सम्प्रभु देशो में से 159 देश ऐसे है जो अपने नाम के साथ रिपब्लिक स्टेट लगाते हैं। संसार के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अमरीका,फ्रांस, चीन,ब्रिटेन सहित भारत भी उस सूची में शामिल है जो अपने आप को गणराज्य कहने का गौरव रखते है।  गणतंत्र में गण शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है जनता और तंत्र का अर्थ है प्रणाली, अर्थात गणतंत्र पूरी तरह राष्ट्र की जनता द्वारा संचालित और समर्पित व्यवस्था है।  गणतंत्र या गणराज्य शब्द हमारे भारत के लिए कोई नया नही है 450 ईसापूर्व के भारतीय नगर वैशाली,कपिलवस्तु, मिथिला को दुनिया का सबसे पुराना गणतंत्र माना जाता है। ऋग्वेद में गणराज्य शब्द का प्रयोग चालिस बार तथा अथर्ववेद में नौ बार किया गया है। जबकि पौराणिक ग्रन्थो में अनेकों बार इस शब्द का उल्लेख मिलता है।  भारत के संविधान का निर्माण संविधान निर्माताओं ने अथक परिश्रम के साथ दो साल ग्यारह महीने और अठारह दिनों में किया।  डॉ भीमराव आंबेडकर जो संविधान निर्माण की प्रारुप समिति के अध्...

कविता वीररस

आंदोलन की आड़ में छुप, लगे जिहाद के नारे है हमको ये मंजूर नही है, ये फ़साद के नारे है।  देश विरुद्ध जो बोल रहे हो कुछ तो थोड़ा शर्म करो, या फिर चुल्लू भर पानी मे जाओ जाकर डूब मरो।  सारे मिलकर लड़े चुनाव थे पर जनता ने दुत्कार दिया, फिर से अपना रूप बदलकर मिल गए अब ये सारे है।  हम राम के वंशज है ठहरे हमे हिंसा में विश्वास नही, पर इतना तो तुम भी जानो हम निस्सहाय निःश्वास नही।  हिंद भूमि यह पूण्य वसुंधरा हम सबकी यह माता है, हम सबको है प्यारी ये माँ हम भी इसके प्यारे है।