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Showing posts from September, 2019

वनवे नही है।

कॉफी हाउस में सुधीर और मैं आमने सामने बैठे थे। कॉफी की चुस्की लेते हुए सुधीर बोला, क्या बात है ? तनय आज कुछ उदास लग रहा है। हाँ ! आज रश्मि की बरसी है। दस साल हो गए भाभी जी को गुजरे औ...

कविता।

कुछ यूँही.... कंटीले पौधे खारा पानी बेस्वाद जिंदगी बेकार जवानी चलती साँसे घड़ी की सुइयां रुकता दरिया गंदला पानी उनकी यादे झूठे सपने उनिंदि आँखे सिर्फ पशेमानी उखड़ी साँसे झ...